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राजा का दान और फकीर का मान

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एक बार राजा के दरबार में, एक फ़कीर और उसके शागिर्द गाना गाने के लिए गए। फ़कीर ने सुर ताल के साथ बहुत अच्छा गाना गाया । राजा ने कहा:- इसे खूब सारा सोना दे दो। फ़कीर ने और अच्छा गाया। राजा ने कहा:- इसे हीरे जवाहरात भी दे दो। फकीर ने और भी अच्छा गाना गाया। राजा फिर बोला:- इसे अशरफियाँ भी दे दो। अब की बार फ़कीर ने और भी अच्छा गाना गाया।  राजा ने फिर कहा-इसे खूब सारी ज़मीन भी दे दो। इस तरह फ़कीर गाना गा कर घर चला गया और अपने बीबी बच्चों से बोला- आज हमारे राजा जी ने गाने से खुश होकर खूब सारा इनाम दिया हीरे, जवाहरात, सोना, ज़मीन, अशरफियाँ बहुत कुछ दिया। यह सुनकर फ़क़ीर के घर वाले बहुत खुश हुए। कुछ दिन बीते फ़कीर को अभी तक मिलने वाला इनाम नही पहुँचा।।      फ़कीर दरबार में पता करने पहुंचा, और बोला-राजा जी,आप के द्वारा दिया गया इनाम मुझे अभी तक नहीं मिला? राजा बोला:-अरे फ़कीर, ये लेन देन की बात क्या करता है, तू मेरे कानों को खुश करता रहा और मैं तेरे कानों को खुश करता रहा । बेचारा फकीर बेहोश । #जुमलेबाज की घोषणाओ से खुश होने वाली जनता का इस वाकये से कोई लेना देना नहीं है । #शिक्ष...

महर्षि पिप्लाद

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श्मशान में जब महर्षि दधीचि के मांसपिंड का दाह संस्कार हो रहा था तो उनकी पत्नी अपने पति का वियोग सहन नहीं कर पायीं और पास में ही स्थित विशाल पीपल वृक्ष के कोटर में 3 वर्ष के बालक को रख स्वयम् चिता में बैठकर सती हो गयीं.. इस प्रकार महर्षि दधीचि और उनकी पत्नी का बलिदान हो गया किन्तु पीपल के कोटर में रखा बालक भूख प्यास से तड़प तड़प कर चिल्लाने लगा। जब कोई वस्तु नहीं मिली तो कोटर में गिरे पीपल के गोदों(फल) को खाकर बड़ा होने लगा। कालान्तर में पीपल के पत्तों और फलों को खाकर बालक का जीवन येन केन प्रकारेण सुरक्षित रहा। एक दिन देवर्षि नारद वहाँ से गुजरे। नारद ने पीपल के कोटर में बालक को देखकर उसका परिचय पूंछा- नारद- बालक तुम कौन हो ? बालक- यही तो मैं भी जानना चाहता हूँ । नारद- तुम्हारे जनक कौन हैं ? बालक- यही तो मैं जानना चाहता हूँ । तब नारद ने ध्यान धर देखा। नारद ने आश्चर्यचकित हो बताया कि  हे बालक ! तुम महान दानी महर्षि दधीचि के पुत्र हो। तुम्हारे पिता की अस्थियों का वज्र बनाकर ही देवताओं ने असुरों पर विजय पायी थी। नारद ने बताया कि तुम्हारे पिता दधीचि की मृत्यु मात्र 31 वर्ष की वय में ही ह...

हम सनातनी के वोटों तथा टैक्स से सत्ता भोग रहे BJP और मोदी जी जबाब दे

हम हिंदुओं के वोटों से सत्ता सुख भोग रहे नरेंद्र मोदीजी और भाजपा जवाब दो. 1. केवल दिखावे के लिए धारा 370 हटाकर 1 साल बाद एग्रीकल्चरल लैंड कानून बनाकर बैकडोर से धारा 370 वापस लागू क्यों कर दी? 2. अनेक राज्यों में मुसलमानों को रिजर्वेशन का फायदा दिलाने के लिए OBC में शामिल क्यों किया? 3. पहले जिसका स्वयं पुरजोर विरोध करते रहे पर सत्ता में आने के बाद सच्चर कमेटी के हिंदू विरोधी प्रावधानों को क्यों लागू कर दिया? . 4. CAA बना तो लिया पर उसे आज तक लागू क्यों नहीं किया? 5. एन.आर.सी, एन.आर.सी, का झुनझुना क्यों बजाते रहे... आज तक क्यों नहीं लागू की? 6. रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों को देश से बाहर क्यों नहीं भेजा? 7. दिल्ली में रोहिंग्या / बांग्लादेशी मुसलमानों को पुलिस सुरक्षा के साथ EWS फ्लैट्स क्यों दिए? 8. कांग्रेस से मांग करते रहे पर खुद सत्ता में आने के बाद रामसेतु को राष्ट्रीय स्मारक घोषित क्यों नहीं किया? 9. प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठते ही राम मंदिर के लिए अध्यादेश क्यों नहीं लाए? लगभग 5 साल कोर्ट के निर्णय की प्रतीक्षा क्यों की गई और निर्णय आने के बाद सारा क्रेडिट स्वयं क्यों ल...

आपके दिमाग पर कब्जा कर रही मोदी सरकार

। हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट से उन्हें क्लीन चिट मिल गया की ऐसा कोई घोटाला हुआ ही नहीं था... बोफोर्स के मामले में भी यही हाल था जब भाजपा के लोगो द्वारा स्व. राजीव जी को बदनाम किया जा रहा था। अब वर्तमान के परिपेक्ष्य में मोदी गवर्मेंट पर आते है। ●●◆ चाहे इसके लिए जिम्मेदार कोई पीआर हो या सलाहकार हो.. दाद तो देनी पड़ेगी...!! पब्लिक माइंड पर उसने कब्जा कर लिया। साहेब का शुरू से बोलबाला था। गुरु आडवाणी 2008 मे फैल हो चुके थे, अब चेले की बारी थी। साहेब का माहौल 2010-11 से सुर्खियों में आना चालू हुआ, 12-13 तक साहेब के नाम की घोषणा हो गयी कि वही प्रधानमंत्री बनेंगे। साहेब अर्थात... नरेंद्र दामोदर दास मोदी!! ●●◆ साहेब ने देखा मीडिया की पावर कितनी है। साहेब ने देखा कि मीडिया ने अन्ना आंदोलन के बूते दिल्ली गवर्मेंट में सालों से स्थापित कांग्रेस को धराशाही कर दिया।  साहेब ने देखा की उसी आंदोलन के बूते दोबारा भाजपा को पटखनी मिल गयी और फिर से आम आदमी पार्टी की गवर्मेंट बन गयी।  साहेब को ये जुगाड़ पसन्द आ गया। मीडिया की पावर समझ आ गयी। ●●◆ असली कहानी यही से शुरू होती है। साहेब ने पब्लिक ...

सफलता का मन्त्र

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                  स्वामी विवेकानंद का बहुत लोकप्रिय कथन है 'उठो, जागो और तब तक मत रुको, जब तक अपने लक्ष्य को न प्राप्त कर लो'। इस बात से प्रेरणा लेने की जगह कई बार लोग एक-दो बार असफल होने पर अपने लक्ष्य को पाने के लिए किए जाने वाले प्रयासों को छोड़कर ही बैठ जाते हैं। इसके विपरीत अगर हम अपनी कोशिशें जारी रखें तो हमें सफल होने से कोई नहीं रोक सकता है। यही बात इस कहानी में भी बताई गई है।              एक प्रयोग में एक रिसर्च बायोलॉजिस्ट ने एक बड़े से टैंक में शार्क मछली को रखा और फिर उसी टैंक में छोटी मछलियों को भी डाल दिया। शार्क ने छोटी मछलियों को खाना शुरू कर दिया और कुछ ही घंटों में सभी छोटी मछलियां शार्क का आहार बन चुकी थीं। हर बार यही होता। बायोलॉजिस्ट ने अब अपने प्रयोग में थोड़ा परिवर्तन किया और एक मजबूत फाइबर स्लाइड को उस टैंक में डाल कर टैंक को दो भागों में बांट दिया। एक भाग में शार्क और दूसरे भाग में छोटी मछलियों को रखा। आदतन शार्क ने छोटी मछलियों पर हमला करना चाहा तो वे उस स्लाइड से टकरा गईं। शार...